खरीदी केंद्र में भारी अव्यवस्था साय सरकार एक मुश्त 3100 भुगतान करने की वादे से मुकर रहीं हैं--निशु



धमतरी।कांग्रेस के जुझारू नेता एवं जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष नीशू चन्द्राकर ने धमतरी विकासखंड के विभिन्न धान खरीदी केन्द्रो मे पहुंचकर धान खरीदी का जायजा लिया जहां किसानों से चर्चा कर हो रही दिक्कतों के संबंध में जानकारी ली।इस विषय को लेकर नीशू चन्द्राकर ने कहा कि किसानो की सबसे बड़ी समस्या टोकन नहीं कटने की है। किसान सुबह से चॉइस सेंटरो की चक्कर काट रहे हैं।ऑफलाइन टोकन प्रबंधक के द्वारा निजी लोगों को दिया जा रहा है. जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है. जबकि सरकार केवल आश्वासन देने में व्यस्त है। आगे कहा की छत्तीसगढ़ में साय सरकार के गठन के बाद से ही किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। कभी खाद वितरण की समस्या, तो कभी पटवारी कार्यालयों के चक्कर—किसानों का कोई भी काम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है। धान खरीदी केन्द्रो में खरीदी की लिमिट को न्यूनतम स्तर पर ला दिया गया है. यह स्थिति सरकार की किसान विरोधी मानसिकता को दर्शाती है।


उन्होंने आगे कहा कि यह सरकार किसानों की नहीं, व्यापारियों की सरकार साबित हो रही है। श्री चन्द्राकर ने बताया कि किसानों की धान कटकर पूरी तरह तैयार है, लेकिन बेचने के लिए उन्हें फिर भटकना पड़ रहा है। लगभग 25 दिन से धान खरीदी जारी है, लेकिन अब तक धान उठाव प्रारंभ नहीं हो पाया है। यदि उठाव में और देरी हुई तो उपार्जन केंद्रों में जाम की स्थिति बनेगी और इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि नमी और अन्य तकनीकी बहाने बनाकर किसानों की धान वापस की जा रही है, जिससे उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फिर रहा है। यह सब दर्शाता है कि साय सरकार पारदर्शी तरीके से धान खरीदी कराने में पूरी तरह असफल रही है। आगे कहा की प्रदेश भाजपा साय सरकार के द्वारा चुनाव के समय मोदी की गारंटी के नाम पर किसानों को ₹3100 एक मुश्त भुगतान का वादा किया गया था लेकिन मोदी की गारंटी हर क्षेत्र में असफल साबित हो रहीं है किसानों को 2369 रुपये का भुगतान किया जा रहा है. देश के मोदी सरकार तीन काले कृषि कानून लाकर किसानों को अपने अधिकारों के लिए लड़ते-लड़ते मरने में विवश कर देती है. वैसे ही आज प्रदेश की साय सरकार कृषि प्रधान राज्य में किसानों के साथ कर रहीं है। सरकार के मंत्री 2047 मे विकसित प्रदेश की सपना दिखा रहे हैं. शायद भारतीय जनता पार्टी के नेता भूल जाते हैं की यह एक लोकतान्त्रिक देश है. जहां हर 5 साल बात जनता के द्वारा नए मुखिया का चुनाव किया जाता है. भाजपा सरकार को 2047 की चिंता छोड़ वर्तमान परिस्थितियों में ध्यान देना चाहिए।

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